Wednesday, May 19, 2010

रोज गार्डन - 'बाहर दौड़ती डामर की सड़क और उड़ता सीमेंट का फ्लाइओवर, इनसे झुलसाए गुलाबों के बाग में आएं'

थोड़ा हरियाला आराम, थोड़ी गीली गपशप। लेख व सभी फोटो : संदीप शर्मा

दिल्ली की तपतपाती गर्मी के सामने जब पंखे, कूलर और एसी तक पानी भरने लगते हैं तो पार्कों की खुली हवा और पेड़ों की ठंडी छांव का आश्रय लेना एक अच्छा विकल्प बन जाता है। यही वजह है कि हौज खास स्थित रोज गार्डन आजकल दोपहर के समय भी गुलजार रहता है। पांच एकड़ में फैला यह विशालकाय गार्डन हर रोज करीब एक हजार लोगों को हष्ट-पुष्ट और तंदरुस्त रखने में मदद करता है। एक ओर जहां युवाजन इस गार्डन के खुले वातावरण में अपने प्रेम रोग का इलाज ढूंडते हैं वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग लोग इस गार्डन के गोल-गोल चक्कर काट कर युवा दिखने की बूटी तलाशते हैं।

अरविंदो मार्ग पर एसडीए फ्लैट में रहने वाले 87 वर्षीय रतनलाल, जो कि पेशे से एक स्टॉक ब्रोकर हैं रविवार को छोड़ कर हर रोज सुबह और शाम के वक्त इस गार्डन में आते हैं। बॉक्सिंग का उन्हें बहुत शौक है इसलिए 5-10 मिनट इसका भी अभ्यास कर लेते है। रतनलाल का इस गार्डन के साथ कफी अनुभव रहा है । वे बताते हैं कि 1985-86 तक, जब तक इस गार्डन को विकसित नहीं किया गया था तब तक यहां घनघोर जंगल था। नील गाय, मोर और अन्य कई जंगली जानवर इस इलाके में निर्भीक होकर घूमते थे। पार्क में जगह जगह प्रेम रस में लीन प्रेमी जोड़ों के बारे में जब मैंने उनकी राय जाननी चाही तो उन्होंने मेरी तरफ देखा और हंस कर बोले, एक दूसरे को प्यार करने और प्यार का इजहार करने का इससे सस्ता और बढ़िया तरीका और क्या हो सकता है। मायानगरी मुम्बई का अपना एक अनुभव मेरे साथ साझा करते हुए रतनलाल जी थोड़े गंभीर जरूर हो गए थे। उन्होंने कहा कि यह प्यार उस प्यार से तो सौ दर्जे बेहतर है जिसमें प्यार की खुशबू बेड की चादर बदलने के साथ ही उड़ जाती है। इस पार्क में आने वाले लगभग हरएक बच्चे, बड़े और बूढ़े से उनको विशष लगाव रहता है इसिलिए शायद वह मेरे साथ ऐसा बर्ताव कर रहे थे जैसे मानो वह मुझे कई सालों से जानते है।

रोज गार्डन के सुपरवाइजर आर के चौधरी इस गार्डन को अपना घर और इस गार्डन के हरएक पेड़ और फूल को अपना बच्चा समझते हैं। चौधरी बताते हैं कि वैसे तो यहां गुलाब के फूलों की विशेष रुप से भरमार रहती है लकिन गुलाब के अतिरिक्त यहां फूलों की 31 अन्य प्रजातियां भी हैं। अपने बच्चे समान इन पेड़ पौधों को जब वह अच्छे से देख-भाल नहीं कर पाते हैं तो मायूस जरूर हो जाते हैं। दरअसल इतने विशाल गार्डन की देख-रेख के लिए सिर्फ 20 कर्मचारी ही तैनात हैं। समस्या इतनी ही नहीं है, पार्क दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधीन आता हे इसलिए पार्क के रखरखाव पर खर्च की जाने वाली धन राशि के लिए प्राधिकरण पर निर्भर रहना पड़ता है। चौधरी कहते हैं कि पार्क में पानी का स्तर काफी निचे चला गया है इसलिए समस्या और बढ़ जाती है।

फिल्हाल रोज गार्डन जेएनयू और आईआईटी जैसे संस्थानों से घिरे होने के कारण हर वक्त गुलजार रहता है इसलिए शायद इसकी खामियों की तरफ कभी ही किसी का ध्यान जा पाता है।
अपने झुलसे कुनबे के बीच खड़ा अकेला गुलाब
बागों में बनता अस्थाई समाज - विवेचना इस समाजशास्त्र की

रोज़ गार्डन के दरवाजे से शुरू होती है कईयों की सुबह

7 comments:

गजेन्द्र सिंह भाटी said...

I am happy to see this wonderfull start by sndeep.

all the best. keep the innovative reporting going.

I liked the Rose Garden story. this garden is really wonderfully beautiful from the inside. You could have gone to the interiors of it.

Even you can do one more story on it. But, I am happy that now there will be a great photo-writing blog especially on the grand-old as well as New Delhi.

sukh sagar said...

mujhe vishawaass nahi ho raha ki delhi jaise shahar(Rashtrapati bhawan ko chod k) me bhi aisi jari bhari....ran birangi...shant jagah hogi...

agli baar to jarooor dekhunga.....

yaaaaaaaa i am comingggg

sukh sagar singh bhati
http://discussiondarbar.blogspot.com/

Amit said...

आपका प्रयास सराहनीय है....लेकिन मुझे सरसरी तौर पर पढ़ने के बाद मात्राओं को लेकर, भाषा को लेकर कुछ गलतियां दिखाई पड़ी....मुझे उम्मीद है आगे से तुम उन पर ध्यान दोगे....साथ ही धन्यवाद कि आपने मुझे ये मौका दिया....
अमित

kirti said...

jama masjid par aapka lekh padha kaafi accha laga, ek baat bataiye kya ye sabhi photos aapne click ki h?? agar haan to bahut hi acchi h mind blowing.

Anonymous said...

sandip ji dil khush hua. aapkd prayas achha raha. lajavab...

Varun Shailesh said...

achha kar jahe hain aap. kamal kar diya aapne...

Aadarsh said...

bhut achi story h yr photo dek kr iimc ke din yaad aagye.....